Sat. Feb 21st, 2026

धीमी गहरी सांस लेने से सुधरती है याददाश्त और एकाग्रता – नई रिसर्च से खुलासा

Healthbhaskar.com: रायपुर, 20 फरवरी 2026। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स रायपुर ने चिकित्सा शोध के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए सिकल सेल डिज़ीज़ के कॉग्निटिव पहलुओं पर अपनी पहली पीएचडी डिग्री प्रदान की है। यह सम्मान सिकल सेल रोग से पीड़ित तरुण साहू को दिया गया, जिन्होंने अपनी कठिन बीमारी के बावजूद उच्च स्तर का शोध कर यह उपलब्धि हासिल की है। यह न केवल एम्स रायपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण है।

सिकल सेल रोगियों के लिए नई उम्मीद बनी रिसर्च

तरुण साहू ने फिजियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. रामंजन सिन्हा के मार्गदर्शन में यह शोध कार्य पूरा किया है। उनके शोध का विषय सिकल सेल डिज़ीज़ में न्यूरोकॉग्निशन पर स्लो डीप ब्रीदिंग के प्रभाव का अध्ययन करना था। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि रोज़ाना धीमी और गहरी सांस लेने की प्रक्रिया सिकल सेल रोगियों की याददाश्त, ध्यान, एकाग्रता और मानसिक सजगता को किस हद तक बेहतर बना सकती है।

20 मिनट की सांस प्रक्रिया से बड़ा लाभ

रिसर्च के नतीजों से पता चला कि यदि मरीज रोजाना केवल 20 मिनट तक धीमी और गहरी सांस लेने का अभ्यास करें, तो उनकी स्मरण शक्ति, ध्यान क्षमता और मानसिक सतर्कता में उल्लेखनीय सुधार होता है। यह तरीका बेहद आसान, सुरक्षित और कम खर्चीला है, जिसे घर पर भी आसानी से अपनाया जा सकता है। यह तकनीक पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति पर आधारित है और बिना किसी दवा के सकारात्मक परिणाम देती है।

बहु-विषयक टीम का महत्वपूर्ण योगदान

इस महत्वपूर्ण शोध में फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, मेडिसिन और साइकियाट्री विभागों के विशेषज्ञों का सहयोग रहा है, जिनमे प्रो. मीनाक्षी सिन्हा, प्रो. एली महापात्रा, प्रो. प्रीतम वासनिक, प्रो. अविनाश इंगले और डॉ. साई के. टिक्का सहित कई वरिष्ठ चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इसके अलावा, एम्स नई दिल्ली और निमहंस बेंगलुरु जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों से भी शैक्षणिक सहयोग प्राप्त हुआ।

वैज्ञानिक पद्धति से हुआ गहन अध्ययन

रिसर्च के दौरान मरीजों में मानसिक स्थिति का मूल्यांकन साइकोलॉजिकल टेस्ट, EEG, विजुअल और ऑडिटरी ERP जैसे आधुनिक तरीकों से किया गया। इसके साथ ही न्यूरोकेमिकल परीक्षण भी किए गए। अध्ययन में यह साबित हुआ कि स्लो डीप ब्रीदिंग से दिमाग की कार्यक्षमता बेहतर होती है और तनाव भी कम होता है।

सिकल सेल समुदाय के लिए मील का पत्थर

यह शोध सिकल सेल रोग से पीड़ित लाखों लोगों के लिए नई आशा लेकर आया है। यह तकनीक न केवल अस्पतालों में बल्कि समुदाय स्तर और घरेलू देखभाल में भी अपनाई जा सकती है। इससे मरीजों का जीवन स्तर बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।

कार्यकारी निदेशक ने दी बधाई

एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरी टीम और शोधार्थी तरुण साहू को बधाई देते हुए कहा कि यह शोध सिकल सेल रोग के उपचार और पुनर्वास के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान करेगा तथा भविष्य में और भी प्रभावशाली शोध कार्यों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

 


 

You cannot copy content of this page