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सर्दियों में अपने हृदय का रखें विशेष ध्यान, थोड़ी सी लापरवाही बन सकती है जानलेवा

Healthbhaskar.com: रायपुर, 9 जनवरी 2026। सर्दियों का मौसम जहां एक ओर ठंडक और राहत लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह हृदय रोगियों और उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए गंभीर खतरे भी बढ़ा देता है। चिकित्सा विशेषज्ञों और हालिया स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, सर्दियों के महीनों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और ब्लड प्रेशर से जुड़ी जटिलताओं के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। ठंड के कारण रक्त नलिकाओं का संकुचित होना, रक्तचाप का बढ़ना और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ना इसकी प्रमुख वजह मानी जाती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि ठंड के मौसम में शरीर को सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़, हृदयाघात (Heart Attack) और अरिदमिया जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। खासकर बुजुर्ग, मधुमेह रोगी, उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोग और पहले से हृदय रोग से ग्रस्त मरीजों को सर्दियों में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

ठंड और हृदय के बीच क्या है संबंध

चिकित्सकों के अनुसार, सर्दियों में शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हृदय को अधिक बल लगाकर रक्त पंप करना पड़ता है। इसके अलावा ठंड में शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, लोग धूप से बचते हैं और भारी, तला-भुना भोजन अधिक लेने लगते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का कारण बनता है। यह सभी कारक मिलकर हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।

स्वस्थ आहार है सबसे बड़ा बचाव

हृदय विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में संतुलित और हृदय-हितैषी आहार अपनाना बेहद जरूरी है। आहार में हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करना चाहिए। अत्यधिक नमक, घी, मक्खन, तले-भुने और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है। साथ ही, सर्दियों में प्यास कम लगने के कारण लोग पानी कम पीते हैं, जिससे रक्त गाढ़ा हो सकता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए पर्याप्त जल सेवन को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

नियमित जांच और हल्का व्यायाम है जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में पूरी तरह शारीरिक गतिविधि बंद कर देना हृदय के लिए नुकसानदायक हो सकता है। रोजाना हल्का व्यायाम, योग, प्राणायाम या टहलना हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक होता है। हालांकि अत्यधिक ठंड में अचानक भारी व्यायाम करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद आवश्यक है। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ईसीजी जैसी जांचें समय-समय पर कराते रहना चाहिए, ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके।

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

चिकित्सकों का कहना है कि सर्दियों में हृदयाघात के लक्षण कई बार स्पष्ट नहीं होते, जिससे मरीज देर से अस्पताल पहुंचता है। सीने में दर्द या भारीपन, घबराहट, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना, चक्कर आना, जबड़े या बाएं हाथ में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे मामूली समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल में चिकित्सकीय सलाह लेना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।

जनस्वास्थ्य के लिए चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि सर्दियों में हृदय रोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए जन-जागरूकता अभियान और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यदि लोग समय रहते सावधानी बरतें, तो हृदय रोगों से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सर्दियों का आनंद तभी सुरक्षित है जब हम अपने हृदय का विशेष ख्याल रखें। स्वस्थ जीवनशैली, समय पर जांच और लक्षणों के प्रति सतर्कता ही मजबूत हृदय की कुंजी है।

 

 


 

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