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छत्तीसगढ़ में मेडिकल स्नातकोत्तर भर्ती पर संकट, ‘जीरो ईयर’ का मंडराता खतरा

Healthbhaskar.com: रायपुर | 22 दिसंबर 2025 छत्तीसगढ़ के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों की भर्ती प्रक्रिया गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। काउंसलिंग नियमों में बार-बार किए गए बदलाव और समय पर न्यायिक निर्देशों का पालन न होने के कारण राज्य में ‘जीरो ईयर’ की स्थिति बनने का खतरा उत्पन्न हो गया है। यह स्थिति न केवल योग्य छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे पर भी दीर्घकालिक असर डाल सकती है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का खतरा, मेडिकल PG भर्ती में देरी से चिंता

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह ने बताया कि बीते तीन महीनों से स्नातकोत्तर काउंसलिंग प्रक्रिया अनिश्चितता में फंसी हुई है। नियमों में बार-बार फेरबदल के चलते राज्य सरकार और मेरिट सूची में स्थान पाने वाले छात्रों के बीच मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट और माननीय हाईकोर्ट, बिलासपुर में लंबित है। इस कारण राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। डॉ. हीरा सिंह ने बताया की अखिल भारतीय मेरिट सूची जारी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य कोटे में अचानक बदलाव कर दिया गया, जिससे छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों का कोटा घटकर 25 प्रतिशत रह गया। यह निर्णय देश के अन्य राज्यों में प्रचलित सीट आवंटन प्रक्रिया के विपरीत है। न्याय की मांग को लेकर प्रभावित छात्रों को उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा रहा है।

पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने के निर्देश दिए थे। लेकिन आरोप है कि राज्य सरकार ने अब तक यह याचिका दायर नहीं की है। यदि रिव्यू पिटीशन दायर की जाती, तो छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुके छात्रों को राहत मिल सकती थी। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा पूर्व में दिए गए आश्वासन के बावजूद कार्रवाई न होने से कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह एवं जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री की अकर्मण्यता और वादाखिलाफी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने प्रारंभिक राजपत्र को मान्य करते हुए राज्य मेडिकल कॉलेजों में छत्तीसगढ़ के छात्रों के लिए 50 प्रतिशत कोटा बहाल करने की मांग की है। डॉ. रेशम सिंह के अनुसार यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो राज्य में स्नातकोत्तर सीटों का एक शैक्षणिक वर्ष पूरी तरह बर्बाद हो सकता है।

PG सीट विवाद सुप्रीम कोर्ट–हाईकोर्ट में लंबित, स्वास्थ्य व्यवस्था पर खतरा

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि पीजी सीटों पर भर्ती न होने से भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी हो सकती है, जिसका सीधा असर रोगी देखभाल, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा। समय रहते निर्णय न लिया गया तो यह संकट राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।


 

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