नर्सिंग अधिकारियों की लंबित मांगों पर फिर उठा सवाल, आश्वासन के वर्षों बाद भी निर्णय अधर में
Healthbhaskar.com: रायपुर | 15 दिसंबर 2025 नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार प्रदेश के नर्सिंग संवर्ग की वर्षों पुरानी मांगें अब भी लंबित हैं, जबकि इन्हें पूरा करने को लेकर सरकार की ओर से पूर्व में कई बार आश्वासन दिए जा चुके हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले नर्सिंग अधिकारियों का कहना है कि नीतिगत निर्णयों में लगातार विलंब से कार्यस्थल संतोष और सेवा गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं।
नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ की अध्यक्ष डॉ. रीना राजपूत ने बताया की संघ के दस्तावेज़ में उल्लेख है कि मई 2018 में प्रदेश स्तरीय आंदोलन के दौरान नर्सिंग संवर्ग को दो दिन तक जेल में रखा गया था। आंदोलन समाप्त कराने के लिए यह आश्वासन दिया गया था कि गठित कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद मांगों को पूरा किया जाएगा। कमेटी ने निर्धारित समय-सीमा में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत भी कर दी, किंतु 30 जून 2021 को बिना स्पष्ट कारण बताए उसे अमान्य कर दिया गया, जिससे संवर्ग में असंतोष गहराता चला गया।
नर्सिंग अधिकारियों के अनुसार 4 जुलाई 2024 को माननीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा यह भरोसा दिलाया गया था कि आगामी दो माह में कैबिनेट बैठक में फाइल प्रस्तुत की जाएगी। इसके बावजूद, लगभग डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी अनुशंसाओं को लागू नहीं किया गया है। संघ का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बावजूद ठोस निर्णय न होना प्रशासनिक संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नर्सिंग संवर्ग से जुड़ी संरचनात्मक और सेवा शर्तों की समस्याओं का समाधान सीधे तौर पर रोगी देखभाल की गुणवत्ता से जुड़ा है। नर्सिंग अधिकारियों का मनोबल सुदृढ़ होने पर अस्पतालों में कार्यकुशलता, सुरक्षा और उपचार परिणाम बेहतर होते हैं। ऐसे में नीति-स्तर पर लंबित निर्णयों का शीघ्र समाधान आवश्यक है।
नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ संघ ने मांग की है कि पूर्व में प्रस्तुत रिपोर्ट की अनुशंसाओं पर पुनर्विचार कर उन्हें लागू किया जाए, ताकि नर्सिंग अधिकारियों को न्याय मिल सके और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके।
