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शिक्षा और साधना का संगम — मैट्स विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने नगपुरा में सीखा स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता का संतुलन

Healthbhaskar.com:  रायपुर 05 अक्टूबर 2025 मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर के योग विद्या संकाय के विद्यार्थियों ने शनिवार, 4 अक्टूबर 2025 को नगपुरा (जिला दुर्ग) स्थित प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र एवं प्राचीन जैन मंदिर का शैक्षणिक भ्रमण किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों, योग साधना, आयुर्वेदिक पद्धतियों और सांस्कृतिक धरोहरों की प्रत्यक्ष जानकारी प्रदान करना था। इस शैक्षणिक यात्रा ने विद्यार्थियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान से परे जाकर वास्तविक अनुभव का अवसर दिया, बल्कि उन्हें भारतीय परंपरा में निहित समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण (Holistic Health Approach) को समझने का भी अवसर प्रदान किया गया।

प्राकृतिक चिकित्सा और योग के अनुभव से साक्षात्कार

विद्यार्थियों ने नगपुरा स्थित प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में पहुंचकर वहाँ की चिकित्सा प्रक्रियाओं का गहराई से अवलोकन किया। विशेषज्ञों द्वारा उन्हें आयुर्वेद (Ayurveda), पंचकर्म (Panchakarma), योग (Yoga) और प्राणायाम (Pranayama) की विभिन्न विधियों की जानकारी दी गई। उन्होंने यह सीखा कि किस प्रकार प्राकृतिक चिकित्सा शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित होती है और आधुनिक जीवनशैली की बीमारियों से निपटने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। केंद्र के चिकित्सकों ने बताया कि मिट्टी चिकित्सा, जल चिकित्सा, सूर्यस्नान और आहार चिकित्सा जैसी पारंपरिक विधियाँ आज भी Lifestyle Disorders जैसे तनाव, मोटापा और मधुमेह में प्रभावी उपचार के रूप में सामने आ रही हैं।

जैन मंदिर में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शिक्षा

प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के बाद विद्यार्थियों ने नगपुरा स्थित प्राचीन जैन मंदिर का भ्रमण किया, जो अपनी स्थापत्य कला और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की शांति, वास्तुशिल्प और कलात्मकता ने विद्यार्थियों को गहराई से प्रभावित किया। यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव भी रहा, जहाँ उन्होंने ध्यान और संयम की भावना को समझा जो योग साधना का मूल तत्व है। संकाय सदस्यों ने बताया कि ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनमें Cultural Awareness, Spiritual Understanding और Emotional Balance जैसी जीवनोपयोगी क्षमताएँ भी विकसित करते हैं।

विश्वविद्यालय प्रबंधन का प्रोत्साहन और मार्गदर्शन

इस शैक्षणिक भ्रमण की सफलता के पीछे कुलाधिपति गजराज पगारिया, कुलपति प्रो. (डॉ.) के. पी. यादव, महानिदेशक प्रियेश पगारिया, कुलसचिव गोकुलानंद पांडा तथा विभागाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह का प्रेरणादायक नेतृत्व रहा। उनके मार्गदर्शन ने विद्यार्थियों को न केवल शैक्षणिक दृष्टि से समृद्ध किया बल्कि उन्हें भारतीय परंपरा के वैज्ञानिक मूल्यों को समझने की दिशा भी प्रदान की हैं। कुलपति प्रो. (डॉ.) के. पी. यादव ने कहा की योग केवल शरीर का व्यायाम नहीं, यह जीवन जीने की कला है। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को परंपरा और विज्ञान के संगम को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का अवसर देते हैं।

संकाय और प्राध्यापकों की सक्रिय भागीदारी

भ्रमण के दौरान विभाग के प्राध्यापकगण दिवेश कुमार, डॉ. योगेश कुमार और डॉ. राघव कुमार वर्मा ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने विद्यार्थियों को योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के वैज्ञानिक आधारों को समझाने के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। शिक्षकों ने बताया कि योग और नेचुरोपैथी (Naturopathy) आज वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य की वैकल्पिक प्रणाली के रूप में उभर रहे हैं, और भारतीय युवाओं को इसमें अनुसंधान व करियर के नए अवसर मिल सकते हैं।

विद्यार्थियों का अनुभव – प्रेरणा और ज्ञान का संगम

विद्यार्थियों ने इस भ्रमण को एक अविस्मरणीय अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहाँ उन्हें न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के नए आयामों की समझ मिली, बल्कि भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्राप्त हुआ है और हमने सीखा कि प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना ही असली स्वास्थ्य है। योग और प्राकृतिक चिकित्सा हमें यही सिखाती हैं।

शैक्षणिक भ्रमण: सीखने की नई परंपरा

संकाय सदस्यों ने बताया कि मैट्स विश्वविद्यालय नियमित रूप से इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण आयोजित करता है ताकि विद्यार्थी Theory to Practice का वास्तविक अनुभव प्राप्त कर सकें। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में Leadership, Observation Skills, Cultural Sensitivity और Research Orientation जैसी क्षमताएँ विकसित होती हैं।

भ्रमण का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जहाँ संकाय सदस्यों ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि योग, प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय संस्कृति का समन्वय आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। मैट्स विश्वविद्यालय ने एक बार फिर यह साबित किया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि अनुभवों और जीवन मूल्यों से भी गढ़ी जाती है।

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